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कब खरीदें

गोल्ड खरीदते समय ये प्रश्न आप अवश्य पूछें

तो आपको गोल्ड खरीदना है। लेकिन क्या आप इसे पूरी केयर के साथ खरीदते हैं? कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न हैं जिन्हे आपको गोल्ड खरीदते समय पूछना चाहिये जो इस प्रकार हैं -

1.     क्या गोल्ड पर बीआईएस हॉलमार्क्ड है?

भारत में 13,700 बीआईएस हॉलमार्क्ड ज्वेलरी शोरुम है और 331 बीआईएस द्वारा मान्य असाइंग व हॉलमार्किंग सेन्टर्स हैं बावजूद इसके देश भर में अनेक स्थान ऎसे हैं जहां पर कोई भी हॉलमार्किंग सेन्टर उपलब्ध नही है।

देखा जाए, तो औसत रुप से वर्तमान में 30% ज्वेलरी हॉलमार्क्ड होती है और इसमें से 80% उच्च वैल्यू के और केवल 10% कम वैल्यू के होते हैं साथ ही कुछ हॉलमार्किंग सेन्टर्स के साथ क्वालिटी और क्रेडेबलिटी को लेकर समस्याएं सामने आ सकती हैं।

आपके लिये यह जानना जरुरी है कि आप जहां से भी गोल्ड खरीद रहे हैं वह बीआईएस (ब्यूरो ऑफ इन्डियन स्टैन्डर्ड्स) हॉलमार्क्ड ज्वेलर हो।

इसके अलावा यह भी जरुरी है कि आप जो ज्वेलरी खरीद रहे हैं वह भी बीआईएस हॉलमार्क की गई हो।

आपको हॉलमार्क्ड ज्वेलरी की पूरी लिस्ट बीआईएस की वेबसाईट पर मिल सकती है।

यदि आपको हॉलमार्किंग के बारे में कोई शिकायत हो या जानकारी चाहिये हो, तब आप बीआईएस से कॉन्टैक्ट कर सकते हैं।

आपको जब भी गोल्ड खरीदना हो, तब आपको बीआईएस हॉलमार्क साईन पर ध्यान देना जरुरी है।

खरीददारों को सावधान रहने की जरुरत है। बीआईएस हॉलमार्क सर्टिफाईड ज्वेलरी मुख्य रुप से ग्रामीण भागों में एक समस्या है, इसमें साल भर की ज्वेलरी का लगभग 60% भाग शामिल है। इसलिये भले ही किसी छोटे शहर या आपके गांव में गोल्ड सस्ता मिल रहा हो, तब उसे तब तक नही खरीदें जब तक कि वह हॉलमार्क किया हुआ नही हो।

2.     गोल्ड के पर ग्राम प्राईज को चेक करें

हमेशा अपनी पर्चेस के समय पर ग्राम गोल्ड प्राईज को जरुर चेक करें।

यह शहर के अनुसार बदलता है और गोल्ड ज्वेलरी के अनेक तत्वों से इसके प्राईज का संबंध होता है। सबसे बडे ज्वेलर्स सामान्य रुप से एक ही प्राईज पर बेचते हैं।

पर ग्राम गोल्ड प्राईज के बारे में जानने का बेहतर तरीका है कि आप विश्वसनीय वेबसाईट्स पर अपनी पर्चेस से पहले चेक जरुर कर लें।

3.     आपको वास्तव में कितना गोल्ड मिल रहा है?

गोल्ड ज्वेलरी का प्राईजिंग कम्पोसिशन थोडा जटिल होता है।

पर ग्राम प्राईज के ऊपर एक खरीददार को वेस्टेज भी देना होता है (इसे ज्वेलरी के अनुसार लिया जाता है और फिर इसकी कैल्क्युलेशन का तरीका जिसे केवल ज्वेलर्स ही जानते हैं)। इसके अलावा, मेकिंग चार्जेस भी होते हैं। एक बार आपने अपना ज्वेलरी पीस चुन लिया, तब मेकिंग चार्जेस या वेस्टेज पर्सेन्टेज को प्राईजिंग चार्ट में से हटा लिया जाता है लेकिन इससे भी आपको प्राईजिंग के बारे में ज्यादा समझ में नही आया ना?

इसे सरल करने का एक तरीका है यह पूछना कि आप जितना मूल्य दे रहे हैं, उसमें आपको वास्तव में कितना गोल्ड मिल रहा है।

उदाहरण के लिये, दस ग्राम गोल्ड चेन का फायनल प्राईज रु. 30,000 है – तब आपने रु 3000 प्रति ग्राम का भुगतान किया है। आपको उस दिन का प्रति ग्राम का रेट क्या है यह देखना है और यह गणना करनी है कि आपको प्रति ग्राम कितना भुगतान करना पड रहा है। यदि इस गणना के बाद भी आप इस डील को करना चाहते हैं, तब आगे बढे।

4.     बाय बैक टर्म्स के बारे में भी चेक करें

कृपया यह चेक करें और देखें कि यदि आप इस ज्वेलरी को आनेवाले समय में वापस करते हैं और कोई दूसरा डिजाईन लेना पसंद करते हैं, तब उनका ऑफर क्या है।

आज अनेक टॉप ज्वेलर्स गोल्ड बाय बैक का प्रॉमिस करते हैं और इसी कीमत पर गोल्ड वापस लेने की व्यवस्था भी करते हैं।

इसका अर्थ यह है कि आपको वेस्टेज या मेकिंग चार्ज वापस नही मिलेगा, लेकिन आपको अश्योरंस जरुर मिलता है कि यह वापस लिया जा सकता है।

इसके साथ ही, एक्स्चेन्ज और बाय बैक पीरियड और पॉलिसी भी होती है जिसके बारे में आपको जानकारी होगी। इससे यह विश्वास दिया जाता है कि किसी भी शिकायत की स्थिति के आने पर आप अपने ऑर्नामेन्ट को वापस कर सकते हैं।

5.     बिल तो जरुर लेना है

इन सारी बातों को इन्श्योर करने के लिये, बिल जरुर लें।

हां, यह सही है कि आपको वैल्यू एडेड टैक्स देना पडे, और यदि आपने 50000 से ज्यादा की रकम खर्च की है तब ज्वेलर को अपना पैन डीटेल भी देना होगा।

लेकिन बिल जिसमें पर्चेस की सारी डीटेल होती है जो आपको सही विश्वास और ट्रान्सपेरेन्सी देती है। यदि आपको किसी मामले में कन्ज्यूमर कोर्ट जाना पडता है, तब यह आपके लिये महत्वपूर्ण होता है।

इसके साथ ही कन्ट्री में गोल्ड मार्केट की ट्रान्सपेरेन्सी के लिये यह आपके योगदान के समान है।

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